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MP में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर, पौने तीन साल में 14 बोर्ड-कंपनियों को मंजूरी, 1.24 लाख पद स्वीकृत

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भोपाल
हरियाणा और उत्तरप्रदेश में सरकारी बिजली कंपनियों के निजीकरण को लेकर सामने आए बड़े गतिरोधों के बीच मध्य प्रदेश में सरकार ने रणनीति बदली है। मोहन सरकार का जोर हर सेक्टर में कंपनियों के अलावा सरकारी संस्थाएं व प्रशासनिक सरंचनाओं को बढ़ाने पर है। पौने 3 साल के कार्यकाल में सरकार ने 14 बोर्ड जमीन पर उत्तारे हैं। कुछ पर काम जारी है।

वहीं, विभिन्न विभागों में 1,24 लाख नए पद सृजित किए हैं। पहले से खाली पदों पर भर्ती भो जारी है। विशेषज्ञ इसे बेहतर बता रहे हैं। हालाकि उनमा कहना है कि आने वाली चुनौतियों को देशाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक समृद्धि, आत्मनिर्भर परिवार जैसे क्षेत्रों में और भी तेज गति से काम करने जरूरत है।

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ये कंपनी, अथॉरिटी, बोर्ड और आयोग मंजूर
भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी- बेंगलुरू, दिल्ली और मुंबई की तरह भोपाल शहर के साथ आसपास के चिह्नित जिलों को को मिलाकर औद्योगिक विकास किया जाएगा। इंदौर-उज्जैन समेत आसपास के जिलों में के विकास के लिए भी अथॉरिटी बनेगी। दोनों ही अथॉरिटी के गठन की प्रक्रिया जारी है।

जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी- इस कंपनी के गठन को हाल ही में मंजूरी दी गई। मौजूदा मुख्य मार्गों के किनारे औद्योगिक सेक्टर विकसित करने का लक्ष्य।

एमपी यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड- सरकार के अधीन वाली 21 माल से बंद लोक परिवाान सेवा को नए स्वरूप में जमीन पर उतारा गया है। इसके बेहतर संचालन के लिए कंपनी बनाई गई है। चुनिंदा मार्ग तय कर बसे चलाना शुरू कर दीं।

नमन मिशन- यह नर्मदा के संरक्षण के लिए काम करेगा, इसका पंजीयन स्वायत्त संस्था के रूप में होगा।

एमपी पुलिस भर्ती बोर्ड- बोर्ड का गठन बाकी है। यह पुलिस में भर्ती के लिए स्वतंत्र रूप से काम करेगा।

एमपी प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग- 25 फीसद लोग संभाग, जिला व तहसीलों की सीमाओं के निर्धारण में की गई रिकार्ड गड्डचड़ी से वर्षों से परेशान हैं। नए सिरे से सीमा निर्धारिण करने के लिए पहली बार आयोग बनाया है। यह कई राज्यों का अध्ययन कर चुका।

संभागीय परिवहन कंपनियां- इन्हें नए सिरे से खड़ा करने की प्रक्रिया जारी, ये अपने-अपने संभागों में सरकार के अधीन लोक परिवहन सेवाओं का नियंत्रण करेंगी

ये विभाग, जिनको सबसे ज्यादा नए पद

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा – 47000

ऊर्जा – 52000

महिला एवं बाल विकास – 13200

गृह – 9662

परिवहन – 1800

3 नए जिले – 1240

नोटः ये पद कैबिनेट से स्वीकृत हैं। इनमें सबसे ज्यादा नियमित पद हैं। इनमें संविदा और आउटसोर्स पर भी।

जमीनी स्तर पर करना होगा काम
जब तक हर परिवार आत्मनिर्भर न हो, तब तक राज्य आत्मनिर्भर नहीं बनता। यह शिक्षा स्वास्थ्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने से होगा। इसके लिए जमीनी स्तर पर विकेंद्रीकृत व दूरगामी योजनाओं के सामा काम करना होगा। – शरदचंद्र बेहार, पूर्व मुख्य सचिव

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