नई दिल्ली
पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इससे पहले सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी खतरे को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक आने वाले 2 से 3 दिन बेहद संवेदनशील हो सकते हैं और आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं. मल्टीपल टेरर अलर्ट जारी होने के बाद कश्मीर से लेकर दिल्ली तक सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट मोड में हैं. खुफिया इनपुट की कॉपी में दिल्ली-NCR को लेकर खास तौर पर गंभीर आशंकाएं जताई गई हैं।
IED पहुंचाने की साजिश
11 अगस्त 2026 को मिले एक खुफिया इनपुट के मुताबिक पाकिस्तान स्थित ISI और प्रो-खालिस्तानी तत्वों से जुड़े नेटवर्क की ओर से दिल्ली-NCR में IED यानी विस्फोटक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है. इनपुट में आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान आधारित नेटवर्क अपने स्थानीय संपर्कों के जरिए विस्फोटक दिल्ली-NCR में मौजूद अज्ञात साथियों तक पहुंचा सकता है।
खुफिया जानकारी के मुताबिक यह IED अगले 2 से 3 दिनों के अंदर स्थानीय संपर्कों तक पहुंचाए जाने की कोशिश हो सकती है. इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली-NCR में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है।
एक नाम का आतंकी खतरा
खुफिया एजेंसियों के इनपुट में पाकिस्तान में मौजूद फरहतुल्लाह गौरी का नाम भी सामने आया है, जिसे भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी बताया जाता है. गौरी पर गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर 2002 में हुए आतंकी हमले से जुड़े होने के आरोप हैं और सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखती रही हैं।
इनपुट के मुताबिक वह सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा है. जून 2026 में 'स्टूडेंट ऑफ हिंद' नाम के सिग्नल ग्रुप पर कथित तौर पर एक मैसेज भेजकर युवाओं को 'आर्मी ऑफ महदी' में शामिल होने के लिए उकसाने की बात भी सामने आई थी।
रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की रेकी
सुरक्षा एजेंसियों को इससे पहले पाकिस्तान-ISI नेटवर्क की ओर से दिल्ली में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की रेकी कराए जाने का इनपुट भी मिला था. खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि भारत में मौजूद स्थानीय संपर्कों की मदद से संवेदनशील जगहों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी जुटाई जा सकती है।
मई 2026 में NIA कंट्रोल रूम को मिले एक व्हाट्सऐप मैसेज में ISI पर भारत में छह बड़े धमाकों की कथित साजिश रचने का आरोप लगाया गया था. इसी दौरान तलहा सईद से जुड़े आठ मुजाहिदीन के भारत में घुसने की जानकारी का दावा भी एक खुफिया इनपुट में किया गया था।
गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल!
मई में सामने आए एक अन्य इनपुट में सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि ISI से जुड़े तत्व भारत में अपने मकसद को पूरा करने के लिए गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं. इनपुट में दिल्ली की अहम इमारतों को निशाना बनाने की संभावित साजिश का भी जिक्र किया गया था।
इससे पहले अप्रैल 2026 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकियों की ओर से दिल्ली, जम्मू और राजस्थान को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई थी. संसद भवन और कनॉट प्लेस जैसे संवेदनशील इलाकों को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले थे, जिसके बाद निगरानी बढ़ाई गई थी।
ऑनलाइन गतिविधियों पर भी नजर
सुरक्षा एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क की गतिविधियों को भी डिकोड करने का दावा किया है. फरवरी 2026 में इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर हुए हमले के बाद बदले की कार्रवाई के नाम पर लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर आधारित आतंकियों की ओर से दिल्ली में IED धमाकों की कथित साजिश का इनपुट सामने आया था।
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 'इस्लाह-ए-उम्मत' नाम के सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और अहम जगहों को निशाना बनाने के लिए उकसाने की जानकारी भी एजेंसियों को मिली थी. इन सभी पुराने और ताजा इनपुट को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां 15 अगस्त से पहले किसी भी संभावित आतंकी साजिश को नाकाम करने में जुटी हैं।
लाल किले पर अभेद सुरक्षा
आतंकी अलर्ट के बीच दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं. लाल किले के चप्पे-चप्पे पर दिल्ली पुलिस के साथ पैरामिलिट्री फोर्स, NSG की हिट टीमें और प्रशिक्षित स्नाइपर्स तैनात रहेंगे. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए NDRF की टीमें भी तैयार रहेंगी और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी. लाल किले और उसके आसपास करीब 5 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है, ताकि समारोह के दौरान किसी भी खतरे से तुरंत निपटा जा सके।
2000 से ज्यादा CCTV कैमरों से निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लाल किले और आसपास के इलाकों में 2000 से ज्यादा CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है. इन कैमरों के साथ FRS और ANPR कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इन तकनीकों की मदद से संदिग्ध लोगों और वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ भीड़ के मूवमेंट को भी मॉनिटर किया जाएगा. मल्टीपल टेरर अलर्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां दिल्ली के अलावा जम्मू-कश्मीर और दूसरे संवेदनशील इलाकों में भी लगातार इनपुट की समीक्षा कर रही हैं।
अगले 2-3 दिन क्यों हैं बेहद अहम?
खुफिया एजेंसियों के ताजा अलर्ट में आने वाले 2 से 3 दिनों को खास तौर पर संवेदनशील बताया गया है. आशंका है कि आतंकी संगठन स्वतंत्रता दिवस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने या किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं. हालांकि किसी भी संभावित हमले को लेकर एजेंसियां लगातार इनपुट की जांच और पुष्टि कर रही हैं तथा सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है।
15 अगस्त के मद्देनजर दिल्ली-NCR से लेकर कश्मीर तक सुरक्षा व्यवस्था को इसलिए पहले के मुकाबले और ज्यादा कड़ा किया गया है, ताकि आतंकियों की किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।








