Home राज्य छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ की स्पान संवर्धन योजना का असर, बस्तर की मनकी बघेल ने...

छत्तीसगढ़ की स्पान संवर्धन योजना का असर, बस्तर की मनकी बघेल ने 2 माह में की ₹15 हजार की कमाई

1
0

बस्तर की मनकी बघेल ने स्पान संवर्धन योजना से 2 माह में कमाए 15 हजार रुपये

अब अंगुलिका उत्पादन से बढ़ाएंगी आमदनी

Ad

रायपुर,
 स्पान संवर्धन योजना छत्तीसगढ़ शासन के मत्स्य पालन विभाग द्वारा चलाई जा रही एक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मछली बीज (स्पान) का स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाना, आदिवासी और स्थानीय मत्स्य कृषकों को वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन सिखाना और उनकी आय में वृद्धि करना है। योजना के तहत मत्स्य कृषकों को उच्च गुणवत्तायुक्त मछली बीज (स्पान) और नर्सरी जाल बिल्कुल मुफ्त दिए जाते हैं। किसानों को तालाब की तैयारी, स्पान संचयन, नर्सरी प्रबंधन और जल की गुणवत्ता सुरक्षित रखने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

             छत्तीसगढ़ शासन के मछली पालन विभाग की स्पान संवर्धन योजना बस्तर जिले के ग्रामीण किसानों के लिए आर्थिक स्वावलंबन का एक नया और सशक्त जरिया बन रही है। योजना का लाभ उठाकर बस्तर विकासखंड के ग्राम सिवनी की महिला किसान मनकी बघेल ने महज दो महीने में 15 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई कर क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है।

सरकारी मदद और मेहनत से मिली सफलता

             मत्स्यपालन विभाग द्वारा मई माह में मनकी बघेल को मिश्रित प्रजाति के लगभग 25 हजार स्पॉन उपलब्ध कराए गए थे। इसके साथ ही तालाब की उर्वरता बढ़ाने के लिए खाद और आहार के रूप में खल्ली दी गई। मनकी ने अपने परिवार के 1 एकड़ में फैले 2 तालाबों में स्पॉन का संवर्धन किया। नियमित आहार, देखभाल और जाल चलाकर की गई निगरानी के बल पर कम समय में उच्च गुणवत्ता की मत्स्य अंगुलिकाएं तैयार हो गईं। विभाग ने तैयार मत्स्य बीज को सुरक्षित बाजार तक पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, पॉलिथीन बैग, बोरी और जाल निःशुल्क उपलब्ध कराए।

कम समय में बेहतर मुनाफा

             मनकी बघेल के भतीजे सुखलाल बघेल ने बताया कि अब तक लगभग 30 किलोग्राम मत्स्य अंगुलिकाएं 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची जा चुकी हैं, जिससे परिवार को 15 हजार रुपये की सीधी आय हुई है। वर्तमान में तालाब में करीब 50 किलोग्राम अंगुलिकाएं बिक्री के लिए और तैयार हैं, जिनसे आगे भी अच्छी कमाई की उम्मीद है। सुखलाल के अनुसार, अंगुलिका उत्पादन पारंपरिक मछली पालन की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो रहा है।

खेती के साथ मत्स्य पालन से मजबूत होगी आर्थिक स्थिति

           बघेल परिवार 7 एकड़ भूमि में खरीफ सीजन के दौरान उन्नत धान और रबी सीजन में नदी किनारे 2 एकड़ में मक्का व सब्जियों की खेती करता है। इस सफल अनुभव से उत्साहित होकर परिवार ने अगले वर्ष अंगुलिका उत्पादन का विस्तार करने का फैसला किया है, जिससे कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन को भी अपनी आय का मुख्य स्तंभ बनाया जा सके।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here