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भोपाल रेल मंडल में एंटी-बर्ड डिस्क की तैनाती, पक्षियों से होने वाले शॉर्ट सर्किट और ट्रेन बाधा पर लगेगी रोक

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भोपाल.

भोपाल रेल मंडल में ट्रेनों के सुरक्षित और निर्बाध संचालन के लिए रेलवे एक नई तकनीक अपनाने जा रहा है। ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन पर पक्षियों के बैठने और उनके कारण होने वाली तकनीकी खराबियों को रोकने के लिए मंडल में एंटी-बर्ड डिस्क लगाई जाएंगी। इस परियोजना पर करीब 4.06 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे और इसे 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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ओएचई लाइन में क्यों आती है समस्या
जानकारी के अनुसार, इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन ओएचई लाइन से मिलने वाली बिजली पर निर्भर करता है। कई बार पक्षी तारों, इंसुलेटर या अन्य विद्युत उपकरणों पर बैठ जाते हैं। उनके संपर्क में आने या पक्षियों की बीट और घोंसलों के कारण शार्ट सर्किट, फ्लैशओवर और अन्य बिजली संबंधी फाल्ट पैदा हो जाते हैं। इससे बिजली आपूर्ति बाधित होती है और ट्रेनों को रोकना पड़ता है या उनकी गति कम करनी पड़ती है।

कैसे काम करेगी एंटी-बर्ड डिस्क
रेलवे ओएचई के संवेदनशील स्थानों पर विशेष डिजाइन वाली एंटी-बर्ड डिस्क लगाएगा। इन डिस्क की बनावट ऐसी होती है कि पक्षी उन जगहों पर बैठ नहीं पाते। इससे विद्युत उपकरणों के सीधे संपर्क में आने की संभावना काफी कम हो जाती है और ओएचई सिस्टम सुरक्षित तरीके से काम करता है।

फाल्ट कम होंगे, ट्रेनें समय पर चलेंगी
एंटी-बर्ड डिस्क लगने के बाद पक्षियों के कारण होने वाले फाल्ट में कमी आने की उम्मीद है। बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं घटेंगी, जिससे ट्रेनों का संचालन बिना अनावश्यक रुकावट के हो सकेगा। इससे ट्रेनें अधिक समय पर चलेंगी और यात्रियों को कम परेशानी होगी।

रखरखाव का खर्च भी घटेगा
वर्तमान में पक्षियों से होने वाले फाल्ट के कारण रेलवे कर्मचारियों को बार-बार मरम्मत कार्य करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद आपातकालीन मरम्मत की जरूरत कम पड़ेगी। इससे रखरखाव पर होने वाला खर्च घटेगा और कर्मचारियों का समय भी बचेगा।

सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा कदम
ओएचई लाइन में अचानक आने वाले फाल्ट कम होने से परिचालन सुरक्षा भी बढ़ेगी। रेलवे कर्मचारियों को बार-बार ट्रैक और ओएचई उपकरणों के पास जाकर आपातकालीन सुधार कार्य नहीं करना पड़ेगा। इससे कर्मचारियों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा बेहतर होगी।

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