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कलेक्टरों की शक्तियों में कटौती, अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री रोकने के अधिकार पर लगी रोक

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भोपाल 

प्रदेश में अवैध कालोनी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री रोकने या उस पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। सरकार का कहना है कि अवैध कालोनी में रजिस्ट्री रोकने का निर्णय कलेक्टर नहीं ले सकते। अवैध कालोनी अधिनियम में तय प्रावधानों के अनुसार उनका अधिकार केवल संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई करने तक ही सीमित है। 

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बिना न्यायिक आदेश के लीगली वैध नहीं
आपको बता दें वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी, स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। उनका कहना है कि इन स्थितियों के बिना खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं माना जा सकता। 

कलेक्टरों को निर्देश 
आपको बता दें वाणिज्यिक कर विभाग ने सभी कलेक्टरों से कहा है कि रजिस्ट्री के दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता । वह केवल पक्षकारों के बीच हुई लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र एक सार्वजनिक साक्ष्य होता है। 

संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर जारी 
इस संबंध में ​सरकार के वित्त विभाग ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर लिख कर जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन की जानकारी मांगी गई है। जिसके आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है।

रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इन स्थितियों के बगैर खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं है।

वाणिज्यिक कर विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं बल्कि पक्षकारों के बीच लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है।

सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन के आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है।

प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर विभाग अमित राठौर ने यह पत्र जारी कर कहा है कि ऐसे आदेश या निर्देश के अवलोकन से यह भी साफ हुआ है कि इनमें से अधिकांश में प्रतिबंध के आधार स्वरूप किसी वैधानिक प्रा‌वधान का उल्लेख नहीं रहता है तथा जिन मामले में अधिनियम या नियम का उल्लेख किया भी जाता है तो उनमें रजिस्ट्री पर रोक संबंधी कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं होता है।

कई प्रकरणों में पंजीयन अधिकारी पर पंजीयन से पहले वैध कालोनी के संबंध में जांच का भार भी डाला गया है, यह नियम विरुद्ध है।

रजिस्ट्री से पहले पहचान और सहमति की पुष्टि अनिवार्य
प्रमुख सचिव  के अनुसार संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर कानून में स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी को दस्तावेज के पंजीयन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान का सत्यापन करना होता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि दस्तावेज प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति उसकी रजिस्ट्री के लिए अपनी सहमति दे रहा है।

उन्होंने कहा कि पंजीयन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के साथ आवश्यक अभिलेखों की सूची और उनकी प्रक्रिया मध्यप्रदेश पंजीयन नियम, 1939 में निर्धारित की गई है। इन नियमों के तहत जिन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, केवल उन्हीं मामलों में पंजीयन अधिकारी रजिस्ट्री करने से इनकार कर सकता है।

प्रमुख सचिव के अनुसार, नियमों में निर्धारित कारणों के अलावा किसी अन्य आधार पर दस्तावेज के पंजीयन को अस्वीकार करने का अधिकार पंजीयन अधिकारी को प्राप्त नहीं है। ऐसे में अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही निर्णय लेना होगा।

विभाग की जांच में यह तथ्य आए सामने
विभाग द्वारा किए गए परीक्षण के बाद यह स्थिति पाई गई है।

    खरीदी-बिक्री और प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर रोक के अलावा संबंधित प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर भी सीधे तौर पर रोक लगी है।

    रजिस्ट्री पर रोक का स्पष्ट उल्लेख न करते हुए सब रजिस्ट्रार या जिला रजिस्ट्रार को आदेश या निर्देश जारी किए गए हैं।

    रजिस्ट्री से पहले ऐसे निषेधात्मक आदेश या पत्र जारी करने वाले प्राधिकारी की अनुमति लेने की अपेक्षा की गई है।

    रजिस्ट्री से पूर्व वैध कालोनी के लिए सभी दस्तावेजों की नियमानुसार जांच की अपेक्षा सब रजिस्ट्रार से की गई है।

कालोनी विकास नियम भी स्पष्ट नहीं होते
प्रमुख सचिव ने कहा है कि कई पत्रों में मध्यप्रदेश
नगरपालिका कालोनी विकास नियम 2021 के नियम का उल्लेख कर रजिस्ट्री पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की शर्त लगाई गई है। यह नियम तय तारीख के पूर्व अस्तित्व में आई अनधिकृत कालोनी के परिप्रेक्ष्य में है। इसलिए रजिस्ट्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते।

रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करना जरूरी

प्रमुख सचिव राठौर ने कहा है कि पंजीयन अधिनियम 1908 के अंतर्गत रजिस्टर्ड होने वाले दस्तावेजों के संबंध में स्थिति स्पष्ट है। इस अधिनियम को लेकर काम करने वाले पंजीयन अधिकारी के लिए पंजीयन पूर्व जांच में प्रावधान अधिनियम में व्यवस्था है।

इसके अनुसार पंजीयन अधिकारी को रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। पंजीयन के लिए पेश किए जाने वाले दस्तावेज के साथ नियमानुसार अपेक्षित दस्तावजों के संबंध में मध्यप्रदेश पंजीयन नियम 1939 के नियम में प्रावधान किए गए हैं। पंजीयन नियम में बताई गई परिस्थितियों में पंजीयन अधिकारी दस्तावेज की रजिस्ट्री इनकार करने में सक्षम है। इसके अलावा अन्य किसी भी आधार पर दस्तावेज के पंजीयन से इनकार करने में पंजीयन अधिकारी वैधानिक रूप से सक्षम नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध माना है
सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश को अलग-अलग निर्णय में अवैध माना है। इन तथ्यों के आधार पर प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर ने कहा है कि अवैधानिक रूप से विकसित की जा रही कालोनियों पर नगरीय आवास और विकास विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित अधिनियमों, नियमों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1956, मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 या अन्य किसी अधिनियम के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी या सक्षम न्यायालय द्वारा संपत्ति विशेष का स्पष्ट ब्यौरा देते हुए न्यायिक और अर्द्ध न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही आदेश जारी कर सकता है।

इस तरह की प्रॉपर्टी के ट्रांसफर, बिक्री पर रोक लगाए जाने की स्थिति में ऐसे आदेशों का नियमानुसार पालन किए जाने की भी आवश्यकता व्यक्त की है।

प्रतिबंध लगाया जाना लीगली वैध नहीं, प्रतिबंध खत्म करें
राठौर ने कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं होकर पक्षकारों के बीच संव्यवहार के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है। इसलिए दस्तावेजों की रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारता और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रकरण के अधीन प्रतिबंध लगाया जाना या खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश, निर्देश के पंजीयन अधिकारियों से पालन करना लीगली वैध नहीं है।

राठौर ने कहा कि दस्तावेजों के पंजीयन पर कोई विधि विरुद्ध प्रतिबंध नहीं लगाए गए। अगर इस तरह के प्रतिबंध प्रभावशील हैं तो उन्हें तत्काल समाप्त किया जाए। कुछ प्राधिकारियों द्वारा सामान्य पत्राचार या बिना सक्षम प्राधिकारिता के अवैधानिक रूप से दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है तो न्यायसंगत नहीं है।

ऐसे निर्देश या आदेश निष्फल मान्य किए जाएं। यह भी कहा गया है कि ये निर्देश नगरीय आवास और विकास ‌विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की सहमति से जारी किए जा रहे हैं।

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