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कलेक्टर तक पहुंचा आरंग नगर पालिका विवाद, CMO बोले- लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं

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आरंग/रायपुर.

नगर पालिका परिषद आरंग में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी अब एक बड़े राजनैतिक-प्रशासनिक विवाद के रूप में सामने आई है। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

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वहीं दूसरी ओर सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए धरातल पर काम होने का दावा किया है। इस खींचतान के बाद आरंग की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में सीएमओ पर शासन के निर्देशों की अनदेखी और निर्वाचित परिषद को दरकिनार करने के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अध्यक्ष का कहना है कि 08 मई को ‘सुशासन तिहार’ के तहत आयोजित समाधान शिविर में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने वार्ड क्रमांक 13 में अधूरे पड़े मिनी माता स्मृति भवन की समीक्षा की थी। मंत्री ने मंच से निर्देश दिए थे कि यदि ठेकेदार 2 दिनों में काम शुरू नहीं करता तो टेंडर निरस्त कर नया टेंडर जारी किया जाए। डॉ. जैन का आरोप है कि कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी न काम शुरू हुआ और न ठेकेदार पर कार्रवाई की गई, जिससे जनता में शासन की छवि धूमिल हो रही है।

बजट प्रस्तुतिकरण में देरी
नियमानुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट 31 मार्च 2026 तक प्रस्तुत होना था, जिसके लिए उन्होंने 16 मार्च को ही लिखित निर्देश दिए थे, परंतु प्रशासन की ढिलाई के कारण यह बजट देरी से 27 अप्रैल की सामान्य सभा में पेश हो सका।

आवास आवंटन में प्रोटोकॉल का उल्लंघन
अध्यक्ष का आरोप है कि एएचपी (अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप) योजना के तहत आवास आवंटन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को उनकी अनुपस्थिति में पूरा किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रोटोकॉल के लिहाज से अनुचित है।

आरोप पूरी तरह निराधार, काम धरातल पर जारी है : शीतल चंद्रवंशी
इस पूरे विवाद पर जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शीतल चंद्रवंशी से बात की गई तो उन्होंने अध्यक्ष के तेवरों और आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रशासनिक व तकनीकी पक्ष सामने रखा। सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने साफ किया कि मिनीमाता स्मृति भवन को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत है। धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है और वर्तमान में वहां सेप्टिक टैंक का स्लैब डालने का कार्य भी पूरा होने जा रहा है।

वैधानिक प्रक्रियाओं की बाध्यता
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किसी भी चालू ठेके को अचानक निरस्त करने की एक लंबी कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया होती है। इसमें एस्टीमेट का पुनर्मूल्यांकन और नियमानुसार नोटिस अवधि देना अनिवार्य होता है, ताकि मामला अदालती दांव-पेच में न फंसे। प्रशासन ने नियमों के दायरे में रहकर ठेकेदार से काम शुरू करवाया है। बजट और आवास आवंटन जैसे बड़े कार्यों में विभागीय स्वीकृतियों, कड़े सरकारी नियमों, स्क्रूटनी (दस्तावेजों की जांच) और प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते कई बार समय-सीमा में व्यावहारिक बदलाव आ जाते हैं। इसमें किसी भी जनप्रतिनिधि की उपेक्षा करने का कोई उद्देश्य नहीं था, बल्कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है।

अब जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरें
आरंग नगर पालिका का यह विवाद यह साफ करता है कि जहां एक तरफ जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेही के कारण कार्यों में तेजी चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं की सीमाओं से बंधे होते हैं। विकास कार्यों को गति देने के लिए इन दोनों स्तंभों के बीच समन्वय होना अनिवार्य है। अब देखना होगा कि कलेक्टर इस शिकायत के बाद दोनों पक्षों के बीच के इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। नगर पालिका में चल रहे गतिरोध से नगर के मूलभूत कार्य जरूर प्रभावित हो सकते हैं।

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