Home राज्य छत्तीसगढ़ स्वरोज़गार की नई खुशबू: लेमनग्रास ने बदली महिलाओं की किस्मत

स्वरोज़गार की नई खुशबू: लेमनग्रास ने बदली महिलाओं की किस्मत

25
0

रायपुर.

लेमनग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रही महिलाएँ

Ad

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अभिनव पहल की जा रही है। वन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार और छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड अध्यक्ष  विकास मरकाम के मार्गदर्शन में बोर्ड द्वारा तैयार कन्वर्जेंस मॉडल के तहत पंचायतों की खाली पड़ी भूमि का उपयोग औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के लिए किया जा रहा है, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा डी.एम.एफ. फंड से सहयोग दिया जा रहा है।

10 महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 156 महिलाओं द्वारा की जा थी है लेमनग्रास की खेती

      
 गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में इस मॉडल को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। मरवाही ब्लॉक के ग्राम पंचायत सेखवा के पथर्रा गांव में पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई गई 50 एकड़ भूमि पर 10 महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 156 महिलाओं द्वारा लेमनग्रास की खेती की जा रही है।
महिलाओं को दिया गया विशेषज्ञ प्रशिक्षण

       
 किसान महिलाओं को खेती से लेकर तेल उत्पादन तक की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराया गया। इसमें मृदा परीक्षण,खेत की तैयारी,जीवामृत निर्माण,रोपण तकनीक,सिंचाई प्रबंधन,फसल कटाई और डिस्टीलेशन यूनिट के माध्यम से तेल निकालने की विधि शामिल है। इसके साथ ही महिलाओं को अध्ययन भ्रमण भी कराया गया, जिससे वे उन्नत तकनीक और सफल मॉडलों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।
डिस्टीलेशन यूनिट और स्लिप्स की निःशुल्क सुविधा

         
बोर्ड द्वारा पंचायत के 50 एकड़ क्षेत्र में डिस्टीलेशन यूनिट की स्थापना कराई गई। साथ ही रोपण के लिए लेमनग्रास की स्लिप्स भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। महिला समूहों ने चार माह तक मेहनत से खेत की जुताई, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और फसल सुरक्षा के कार्य किए, जिसके बाद फसल तैयार होने पर उसका आसवन कर तेल उत्पादन शुरू किया गया।
तेल विक्रय के लिए पहले से किया गया अनुबंध

         
महिलाओं को बाजार की चिंता न करनी पड़े, इसके लिए बोर्ड ने लेमनग्रास की खेती शुरू होने से पहले ही तेल खरीदने वाले संस्थानों से अनुबंध करवा दिया। इससे उत्पादन के तुरंत बाद ही तेल का त्वरित विक्रय संभव हो पाया। पिछले एक वर्ष में दो फसल कटाई के बाद महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा लगभग एक लाख 20 रुपये के लेमनग्रास तेल का विक्रय किया जा चुका है।

आय बढ़ी, महिलाएँ बनीं आत्मनिर्भर

लेमनग्रास तेल की बिक्री से जुड़ी महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब उन्हें अपनी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यह मॉडल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गया है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here