Home देश शुभांशु शुक्ला की नई जिम्मेदारी, छात्रों को विकसित भारत के निर्माता बनाएंगे

शुभांशु शुक्ला की नई जिम्मेदारी, छात्रों को विकसित भारत के निर्माता बनाएंगे

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नई दिल्ली

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक पहुंचने वाले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को केंद्र सरकार के 'विकसित भारत बिल्डाथॉन' का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। यह कार्यक्रम देशभर के स्कूलों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।

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देश का सबसे बड़ा स्कूल हैकाथॉन
'विकसित भारत बिल्डाथॉन' शिक्षा मंत्रालय और अटल इनोवेशन मिशन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा स्कूल हैकाथॉन है, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को जोड़ा जा रहा है। इस पहल के तहत 1.5 लाख स्कूलों के एक करोड़ से अधिक छात्र मिलकर नए विचारों, डिजाइन और प्रोटोटाइप तैयार करेंगे।

चार मुख्य थीम पर काम करेंगे छात्र
विद्यार्थियों को चार राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर प्रोजेक्ट बनाने होंगे। इसमें आत्मनिर्भर भारत- स्वावलंबी तकनीक और समाधान विकसित करना,  स्वदेशी- देशी विचारों और नवाचारों को बढ़ावा देना। वोकल फॉर लोकल- स्थानीय उत्पादों, कला और संसाधनों को प्रोत्साहन देना। समृद्धि – सतत विकास और समृद्धि के मार्ग बनाना शामिल है।

क्या है कार्यक्रम की रूपरेखा?
यह बिल्डाथॉन 23 सितंबर को लॉन्च हुआ था। इसमें पंजीकरण की अंतिम तिथि- 6 अक्तूबर, वहीं इसका लाइव बिल्डाथॉन 13 अक्तूबर को होगा। वहीं विजेताओं की घोषणा दिसंबर महीने में की जाएगी इस दौरान छात्र टीमों में मिलकर अपने विचारों को मूर्त रूप देंगे और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करेंगे।

शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, 39 वर्षीय भारतीय वायुसेना अधिकारी और टेस्ट पायलट हैं। उन्होंने हाल ही में एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की। यह मिशन इसरो, नासा और एक्सिओम स्पेस के सहयोग से संपन्न हुआ। इस यात्रा के साथ वे आईएसएस तक पहुंचने वाले पहले भारतीय और राकेश शर्मा (1984) के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने।

शिक्षा मंत्रालय के साथ हुई चर्चा
शनिवार को शुभांशु शुक्ला ने स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार से मुलाकात की। दोनों के बीच 'विकसित भारत बिल्डाथॉन' की रूपरेखा और उद्देश्य पर बातचीत हुई। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि से जुड़ी है, जिसमें विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने की बात कही गई है ताकि वे भविष्य के 'विकसित भारत' के निर्माता बन सकें।

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