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जल क्रांति से सीहोर के खेतों में लौटी जान, हजारों तालाब-डगवेल से बढ़ा जलस्तर

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सीहोर 

सीहोर जिले में जल संरक्षण को लेकर चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की स्थायी व्यवस्था और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। यह अभियान 30 मार्च से 30 जून 2025 तक चलाया गया था, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी से जल संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों को खेत तालाबों के माध्यम से सिंचाई के स्थायी साधन उपलब्ध कराना था।

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लक्ष्य के करीब पहुंचा तालाब निर्माण कार्य
अभियान के दौरान जिले को 1500 खेत तालाब बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरुद्ध 1491 तालाबों का निर्माण सफलतापूर्वक कराया गया। इसके साथ ही 3000 डगवेल रिचार्ज का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से 2519 डगवेलों का रिचार्ज किया गया। खेत तालाबों के निर्माण से किसानों को वर्षा जल संग्रह करने और अपनी फसलों की समय पर सिंचाई करने में मदद मिली है। इससे एक ओर जहां फसल उत्पादन में स्थिरता आई, वहीं सिंचाई की लागत में भी कमी आई।इसके अलावा, तालाब निर्माण और अन्य संबंधित गतिविधियों से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हुए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला।

मनरेगा से मिला निर्माण कार्यों को आधार
अभियान के दौरान मनरेगा योजना के तहत खेत तालाबों के निर्माण को स्वीकृति दी गई। मनरेगा के संसाधनों का उपयोग कर जल संरक्षण को जमीनी स्तर पर मजबूती दी गई। इससे पानी की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित हुई और जल संकट कम करने में मदद मिली। जिला प्रशासन के अनुसार, इस अभियान के सफल क्रियान्वयन से जल संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। अब प्रयास किया जा रहा है कि जल संरक्षण की इन गतिविधियों को निरंतर जारी रखा जाए, जिससे किसानों को हर फसल सीजन में पर्याप्त जल उपलब्ध हो और क्षेत्र की हरियाली बनी रहे।

 

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