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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म्स का नाम अब ‘घड़ी डिटर्जेंट’, स्टेशन पर दिखेगी ब्रांड की चमक

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नई दिल्ली
देश की राजधानी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अब यात्रियों को एक नया नजारा देखने को मिलेगा। रोज़मर्रा की सफाई में काम आने वाला घड़ी डिटर्जेंट, अब केवल घरों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका नाम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1, 6, 7, 8 और 9 पर प्रमुखता से चमकेगा। आरएसपीएल ग्रुप (RSPL Group) की इस प्रमुख डिटर्जेंट ब्रांड ने भारतीय रेलवे के साथ एक साल के लिए प्लेटफॉर्म्स के नामकरण अधिकार हासिल किए हैं। कंपनी ने गुरुवार को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी।

ब्रांडिंग में दिखेगा घड़ी का नया अवतार
समझौते के तहत इन पांच प्लेटफॉर्म्स पर घड़ी डिटर्जेंट की ब्रांडिंग पैनल, बिलबोर्ड, विनाइल रैपिंग और डिजिटल साइन बोर्ड्स के जरिए की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य है ब्रांड को यात्रियों के बीच अधिक व्यापक रूप से पहुंचाना और स्टेशन की सुंदरता में भी इजाफा करना।

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आरएसपीएल समूह के प्रवक्ता ने कहा:
"यह हमारे लिए मील का पत्थर है। यह अनूठा अवसर हमें अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंचने में मदद करेगा, और हम भारतीय रेलवे के साथ साझेदारी करके बेहद खुश हैं।"

यात्रियों के लिए सुविधाओं में भी बढ़ोतरी
ब्रांडिंग के अलावा, घड़ी डिटर्जेंट ने यात्रियों की सुविधाओं को भी ध्यान में रखा है। समझौते के तहत इन प्लेटफॉर्म्स पर:

➤ महिला फीडिंग रूम

➤ साफ-सुथरे साइन बोर्ड्स

➤ डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन

घड़ी डिटर्जेंट: एक घरेलू ब्रांड से राष्ट्रीय पहचान तक
घड़ी डिटर्जेंट की कहानी 1987 में आरंभ हुई थी, जब आरएसपीएल समूह ने इसे भारतीय बाजार में लॉन्च किया। आज यह भारत के शीर्ष डिटर्जेंट ब्रांड्स में शामिल है, जिसका मार्केट शेयर 25% से अधिक है। इसकी टैगलाइन "पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें" ने इसे आम भारतीय उपभोक्ताओं से जोड़ा और इसे एक भरोसे का नाम बना दिया।

घड़ी की सफलता के पीछे कारण हैं:
➤ किफायती मूल्य

➤ मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क

➤ सटीक मार्केटिंग रणनीति

➤ ग्राहकों की जरूरतों को समझना

ब्रांडिंग और स्टेशन सुधार का नया मॉडल
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यह ब्रांडिंग एक उदाहरण है कि कैसे कॉर्पोरेट साझेदारियों के ज़रिए सार्वजनिक स्थलों को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे ना केवल ब्रांड को नई पहचान मिलती है, बल्कि यात्रियों को सुविधाएं भी बढ़ती हैं। भारतीय रेलवे और निजी कंपनियों के बीच इस तरह की साझेदारियां भविष्य में रेलवे स्टेशनों की सूरत बदलने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती हैं।

 

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